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RPSC की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक ढांचा और भर्ती प्रक्रिया की पूरी जानकारी

RPSC RAS Material

Topic 1: RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग) का परिचय एवं संवैधानिक प्रावधान

RPSC की संवैधानिक स्थिति, अनुच्छेद 315–323, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संरचना, पदच्युति प्रक्रिया एवं ऑनलाइन हेल्पडेस्क का सम्पूर्ण विश्लेषण

मुख्य बिंदु (Key Highlights)
  • स्थापना: 16 अगस्त 1949 को जारी अध्यादेश के बाद 20 अगस्त 1949 को अस्तित्व में आया।
  • मुख्यालय स्थानांतरण: 1956 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर जयपुर से अजमेर स्थापित।
  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का भाग-14, अनुच्छेद 315 से 323।
  • संरचना: 1 अध्यक्ष एवं 7 सदस्य (प्रारंभ में 1+2 सदस्य)।
  • नियुक्ति व पदच्युति: नियुक्ति राज्यपाल द्वारा, पदच्युति केवल राष्ट्रपति द्वारा (अनुच्छेद 317)।

1.1 RPSC की संवैधानिक स्थिति (Constitutional Status)

1.1.1 RPSC का विस्तृत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं स्थापना (Detailed Historical Evolution & Establishment)

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की स्थापना राज्य के पुनर्गठन और प्रशासनिक एकीकरण के दौर में हुई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के पश्चात, राजस्थान की तत्कालीन विभिन्न रियासतों (जैसे जयपुर, जोधपुर, बीकानेर आदि) का एकीकरण प्रारंभ हुआ। स्वतंत्रता से पूर्व केवल तीन रियासतों—जयपुर, जोधपुर और बीकानेर में ही अपने स्वयं के लोक सेवा आयोग कार्यरत थे।

एकीकरण प्रक्रिया के दौरान, प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शी भर्ती प्रणाली स्थापित करने हेतु 16 अगस्त 1949 को 'राजस्थान लोक सेवा आयोग अध्यादेश, 1949' (RPSC Ordinance, 1949) जारी किया गया। यह अध्यादेश 20 अगस्त 1949 को राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित हुआ और इसी तिथि से आयोग अस्तित्व में आया।

  • प्रारंभिक मुख्यालय: स्थापना के समय आयोग का मुख्यालय जयपुर में स्थापित किया गया था।
  • मुख्यालय का स्थानांतरण (अजमेर): राज्य पुनर्गठन के पश्चात प्रशासनिक पुनर्गठन हेतु गठित सत्यनारायण राव समिति (Satyanarayan Rao Committee) की सिफारिशों के आधार पर 1956 में आयोग का मुख्यालय जयपुर से अजमेर (घूघरा घाटी) स्थानांतरित कर दिया गया। तब से आयोग का स्थायी कार्यालय अजमेर में ही संचालित हो रहा है।

1.1.2 संवैधानिक निकाय के रूप में स्थिति (Status as a Constitutional Body)

RPSC एक गैर-संवैधानिक या वैधानिक निकाय न होकर एक पूर्णतः संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है। इसका स्पष्ट उल्लेख भारतीय संविधान में किया गया है:

संविधान का भाग

भाग-14 (Part XIV) – 'संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं' (Services Under the Union and the States)।

अनुच्छेद सीमा

अनुच्छेद 315 से अनुच्छेद 323 तक (Articles 315 to 323)।

स्वायत्तता (Autonomy)

संविधान निर्माताओं ने आयोग को निष्पक्ष, राजनीति से परे और स्वायत्त निकाय के रूप में डिजाइन किया है ताकि राज्य की सिविल सेवाओं में बिना किसी बाह्य या राजनीतिक दबाव के योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जा सके।

1.1.3 संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों का गहन विश्लेषण (Articles 315–323)

अनुच्छेद (Article) संवैधानिक विषय/प्रावधान विस्तृत विश्लेषण एवं प्रशासनिक अनुप्रयोग
अनुच्छेद 315 संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग भारत के प्रत्येक राज्य के लिए एक 'राज्य लोक सेवा आयोग' (SPSC) के गठन का स्पष्ट संवैधानिक आदेश। (दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त आयोग - Joint Public Service Commission का प्रावधान भी इसमें शामिल है, जो संसद के अधिनियम द्वारा बनता है)।
अनुच्छेद 316 सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि राज्य आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल (Governor) द्वारा की जाती है। पदावधि: 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले पूरी हो)।
अनुच्छेद 317 सदस्य का हटाया जाना या निलंबित किया जाना अध्यक्ष या सदस्य को पद से हटाने का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है। निलंबन (Suspension) का अधिकार राज्यपाल के पास है (जांच प्रक्रिया के दौरान)।
अनुच्छेद 318 आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों हेतु नियम बनाने की शक्ति राज्यपाल को आयोग की सदस्य संख्या निर्धारित करने तथा उनके कर्मचारियों की सेवा-शर्तों एवं संख्या हेतु नियम (RPSC Regulations) बनाने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 319 आयोग के सदस्यों द्वारा पद पर न रहने पर पद धारण करने पर प्रतिषेध सेवामुक्ति या कार्यकाल समाप्ति के बाद अध्यक्ष व सदस्य पुनः उसी पद पर नियुक्त नहीं हो सकते। आयोग का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या अन्य राज्य PSC का अध्यक्ष बन सकता है, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य लाभ के पद पर नियोजित नहीं हो सकता।
अनुच्छेद 320 लोक सेवा आयोगों के कृत्य (Functions) सिविल सेवाओं में भर्ती हेतु परीक्षाओं का संचालन, पदोन्नति, स्थानांतरण, अनुशासनात्मक मामलों में सरकार को परामर्श देने संबंधी मुख्य कर्तव्यों का निर्धारण।
अनुच्छेद 321 लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति राज्य विधानमंडल (State Legislature) अधिनियम बनाकर RPSC के कार्यों एवं अधिकार क्षेत्र का विस्तार कर सकता है।
अनुच्छेद 322 लोक सेवा आयोगों के व्यय (Expenses) आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों व कर्मचारियों के वेतन, भत्ते व पेंशन सहित सभी प्रशासनिक व्यय राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of Rajasthan) पर भारित (Charged) होते हैं। इस पर राज्य विधानसभा में मतदान नहीं होता।
अनुच्छेद 323 लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन (Reports) RPSC प्रतिवर्ष अपने द्वारा किए गए कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) राज्यपाल को प्रस्तुत करता है। राज्यपाल इस रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के पटल पर रखवाते हैं।

1.2 आयोग की संरचना एवं कार्यप्रणाली (Structure & Operational Methodology)

1.2.1 आयोग की वर्तमान एवं ऐतिहासिक सदस्य संरचना (Member Strength Evolution)

आयोग के गठन के समय और वर्तमान समय में सदस्यों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, जिसे आवश्यकतानुसार राज्यपाल द्वारा संशोधित किया जाता रहा है:

1949: स्थापना स्वरूप

1 अध्यक्ष: सर एस. के. घोष (Chief Justice Sir S.K. Ghosh)

2 सदस्य: देवीशंकर तिवाड़ी (Devi Shankar Tiwari) एवं चंद्रवदन त्रिपाठी (Chandravadan Tripathi)

▼ (समय-समय पर संशोधन)
वर्तमान संरचना (Current Strength)

1 अध्यक्ष (Chairman) + 7 सदस्य (Members)

  • प्रथम अध्यक्ष: सर एस. के. घोष (Sir S. K. Ghosh - तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय)।
  • प्रथम पूर्णकालिक अध्यक्ष: देवीशंकर तिवाड़ी (Devi Shankar Tiwari) - इनका कार्यकाल आयोग के इतिहास में सबसे लंबा रहा है।
  • योग्यता संबंधी संवैधानिक शर्त (Section 316): संविधान के अनुसार, आयोग के कम से कम आधे (50%) सदस्यों को भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन न्यूनतम 10 वर्ष के प्रशासनिक कार्य का अनुभव होना अनिवार्य है। शेष सदस्यों का चयन शिक्षाविदों, न्यायविदों, डॉक्टरों या अन्य प्रख्यात पेशेवरों में से किया जाता है।

1.2.2 नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल (Appointment & Service Conditions)

  1. नियुक्तिकर्ता: राज्य के राज्यपाल मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की सलाह पर RPSC के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति करते हैं।
  2. कार्यकाल: नियुक्ति की तिथि से 6 वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले घटित हो)। (नोट: 41वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई थी)।
  3. वेतन एवं भत्ते: आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का वेतन राज्य की संचित निधि से दिया जाता है। नियुक्ति के पश्चात उनके वेतन, भत्तों एवं सेवा-शर्तों में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता जो उनके लिए अहितकारी (Disadvantageous) हो।

1.2.3 पदच्युति (Removal) एवं निलंबन (Suspension) प्रक्रिया – अनुच्छेद 317

यद्यपि नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, परंतु राज्यपाल के पास अध्यक्ष या सदस्यों को पद से हटाने (Removal) की शक्ति नहीं है। पदच्युति की शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति में निहित है।

चरण 1

आरोप: सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)

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चरण 2

राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) को संदर्भ (Reference)

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चरण 3

अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट (SC) द्वारा जांच (Inquiry)

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यदि SC निर्दोष पाए

सदस्य अपने पद पर बने रहेंगे।

यदि SC दोषी पाए

SC की सलाह राष्ट्रपति हेतु बाध्यकारी (Binding) → राष्ट्रपति द्वारा पदच्युति का आदेश

पदच्युति के आधार (Click to Expand)
  1. सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour): इस स्थिति में अनुच्छेद 317(1) के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा जांच आवश्यक है।
  2. अन्य स्वतः आधार (Without SC Inquiry - Art. 317(3)):
    • यदि सदस्य को दिवालिया (Insolvent) घोषित कर दिया जाए।
    • यदि वह अपने कार्यकाल के दौरान अपने पद के कर्तव्यों के बाहर किसी सवेतन रोजगार (Paid Employment) में संग्लन हो।
    • यदि राष्ट्रपति की राय में वह मानसिक या शारीरिक अक्षमता (Infirmity of mind or body) के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य हो।
निलंबन प्रक्रिया (Suspension)

जांच प्रक्रिया के दौरान (जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित हो), राज्य का राज्यपाल अध्यक्ष या किसी सदस्य को उनके पद से निलंबित (Suspend) कर सकता है।

1.2.4 आंतरिक प्रशासनिक एवं अनुभागीय संरचना (Internal Administrative Setup)

आयोग का दैनिक संचालन प्रशासनिक शाखा (Administrative Wing) द्वारा संचालित होता है, जिसका प्रमुख सचिव (Secretary) होता है। सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) का वरिष्ठ अधिकारी होता है।

RPSC आयोग (Board)
(अध्यक्ष एवं 7 सदस्य)
सचिव (Secretary)
परीक्षा अनुभाग
(Examination Wing)
भर्ती अनुभाग
(Recruitment Wing)
गोपनीय अनुभाग
(Confidential Wing)
लेखा व प्रशासन
(Accounts & Admin)
विधि/विधिक शाखा
(Legal Section)
IT एवं OTR सेल
(IT & Tech Cell)

1.3 RPSC के मुख्य कार्य एवं भूमिका (Functions & Administrative Role)

1.3.1 सिविल सेवा परीक्षाओं का संचालन एवं सीधी भर्ती (Examinations & Direct Recruitment)

  • प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन: राज्य की शीर्ष सेवाओं हेतु त्रि-स्तरीय व द्वि-स्तरीय परीक्षाओं का आयोजन करना:
    • RAS/RPS (राजस्थान प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा - संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा)।
    • सहायक आचार्य (Assistant Professor - कॉलेज शिक्षा)।
    • वरिष्ठ अध्यापक (Grade-II) एवं प्राध्यापक (Grade-I - स्कूली शिक्षा)।
    • सब-इंस्पेक्टर (SI - राजस्थान पुलिस)।
    • अभियांत्रिकी एवं चिकित्सा सेवाएं (State Engineering & Medical Services)।
  • सीधी भर्ती (Direct Recruitment): साक्षात्कार (Interview) या स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से विभिन्न विभागों में विशेषज्ञ पदों पर सीधी भर्ती करना।

1.3.2 पदोन्नति (Promotions) एवं विभागीय पदोन्नति समितियां (DPC)

  • राज्य लोक सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति (जैसे तहसीलदार से RAS, या DSP से RPS) हेतु DPC (Departmental Promotion Committee) की अध्यक्षता RPSC के अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित सदस्य करते हैं।
  • सेवा-पुस्तिकाओं और वरिष्ठता सूची (Seniority List) के आधार पर पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

1.3.3 अनुशासनात्मक मामले एवं सरकारी परामर्श (Disciplinary Advice & Consultation)

अनुच्छेद 320(3) के अनुसार, राज्य सरकार निम्नलिखित मामलों में RPSC से परामर्श लेने हेतु संवैधानिक रूप से बाध्य है:

  1. भर्ती की पद्धतियों (Recruitment Rules): सिविल सेवाओं और पदों के लिए भर्ती के नियमों से संबंधित सभी विषय।
  2. नियुक्ति के सिद्धांत: सिविल सेवाओं में नियुक्ति, पदोन्नति और एक सेवा से दूसरी सेवा में स्थानांतरण (Transfer) हेतु अपनाए जाने वाले सिद्धांत।
  3. अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Actions): किसी सरकारी कर्मचारी पर लगने वाले दंड, वेतन वृद्धि रोकने, अवनति (Demotion) या सेवा से बर्खास्तगी से संबंधित मामले।
  4. क्षतिपूर्ति दावों (Compensation Claims): कर्तव्य पालन के दौरान किसी कर्मचारी को हुई शारीरिक क्षति के लिए पेंशन/क्षतिपूर्ति दावों का निर्धारण।
परामर्श की सीमा (Limitation)

RPSC द्वारा दिया गया परामर्श सलाहकारी (Advisory) प्रकृति का होता है। सरकार परामर्श मानने के लिए बाध्य नहीं है, परंतु परामर्श न मानने की स्थिति में सरकार को इसका कारण राज्य विधानमंडल के समक्ष स्पष्ट करना पड़ता है। (अनुसूचित जाति/जनजाति के आरक्षण संबंधी मामलों में RPSC से परामर्श आवश्यक नहीं है)।

1.4 RPSC आधिकारिक सहायता एवं हेल्पलाइन (Official Helpdesk & Applicant Support)

आयोग ने अभ्यर्थियों की सुविधाओं, ऑनलाइन फॉर्म भरने की जटिलताओं और OTR समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु डिजिटल सहायता तंत्र स्थापित किया है।

1.4.1 आधिकारिक संपर्क सूत्र एवं हेल्पडेस्क विवरण

आधिकारिक वेबसाइट: https://rpsc.rajasthan.gov.in
मुख्यालय पता: राजस्थान लोक सेवा आयोग, जयपुर रोड, घूघरा घाटी, अजमेर, राजस्थान - 305001।
हेल्पलाइन नंबर (सामान्य पूछताछ): 0145-2635200 / 0145-2635212
ई-मेल सपोर्ट (General Query): feedback.rpsc@rajasthan.gov.in

1.4.2 OTR (One-Time Registration) एवं SSO पोर्टल संबंधी तकनीकी सहायता

राजस्थान सरकार द्वारा लागू एकल द्वि-स्तरीय व्यवस्था (Single Sign-On - SSO) के तहत OTR प्रणाली में आने वाली समस्याओं के लिए विशेष तकनीकी प्रकोष्ठ (IT Cell) कार्य करता है:

SSO पोर्टल लिंक: https://sso.rajasthan.gov.in
OTR तकनीकी हेल्पलाइन: 0141-2922241 / 0141-2922242
OTR हेल्पडेस्क ई-मेल: helpdesk.recruitment@rajasthan.gov.in

1.4.3 अभ्यर्थी सहायता प्रणाली (Candidate Grievance Redressal System)

समस्या/त्रुटि

e.g., OTR Name / DOB Mismatch

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SSO Portal लॉगिन → Recruitment Portal

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My Recruitment → Update OTR

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Aadhaar / Jan Aadhaar Fetch
E-Mitra Support
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यदि समाधान न हो → Helpdesk Ticket / E-mail

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RPSC अजमेर स्थित हेल्पडेस्क पर व्यक्तिगत उपस्थिति

  1. OTR संशोधन की व्यवस्था: OTR में नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि और लिंग में सुधार हेतु जन-आधार या आधार कार्ड के सत्यापन द्वारा स्वचालित पोर्टल सुविधा।
  2. ई-मित्र सहायता केंद्र (E-Mitra Helpdesk): दूरस्थ/ग्रामीण क्षेत्रों के अभ्यर्थियों हेतु प्रत्येक जिला मुख्यालय और ई-मित्र प्लस केंद्रों पर OTR एवं एप्लीकेशन फॉर्म सुधार सुविधा।
  3. परीक्षा दिवस हेल्पलाइन: परीक्षा आयोजन से 3 दिन पूर्व और परीक्षा के दिन अनुक्रमांक, परीक्षा केंद्र और प्रवेश पत्र संबंधी तात्कालिक समस्याओं हेतु विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) संचालित किया जाता है।