RPSC RAS Recruitment Guide: 10-Step Selection Process, Rules & Exam Reforms

RPSC RAS भर्ती की 10-स्तरीय चयन प्रक्रिया, संवैधानिक अनुच्छेद (315-323), Pro-Rata मार्क कैलकुलेशन सूत्र, और RPSC हेल्पलाइन संबंधी पूरी गाइड यहाँ देखें

RPSC RAS Exam New Reforms - Pro Rata Formula, Digital Evaluation OSM & Biometric Security Rules

 

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RPSC RAS भर्ती पोर्टल: संपूर्ण मास्टर प्रशासनिक, कानूनी एवं परीक्षा गाइड

10-स्तरीय चयन लाइफसाइकिल | पोर्टल व हेल्पलाइन सहायता | अनुच्छेद (315-323) | नवीन परीक्षा सुधार व Pro-Rata गणित

1. RAS भर्ती प्रक्रिया: प्रारंभ से अंत तक 10-स्तरीय अति-विस्तृत चयन चक्र

यह चयन प्रक्रिया "राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं (संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा द्वारा सीधी भर्ती) नियम, 1999" के वैधानिक प्रावधानों के तहत संपादित होती है:

चरण 1: विभागीय स्तर पर कैडर समीक्षा एवं रिक्तियों की विस्तृत सूक्ष्म गणना

प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ (1 अप्रैल) में गृह, राजस्व, आबकारी, वाणिज्यिक कर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, महिला एवं बाल विकास, सहकारिता, देवस्थान, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज आदि समस्त राज्य व अधीनस्थ विभाग कैडर समीक्षा करते हैं:

  • सेवानिवृत्ति रिक्तियाँ: चालू एवं आगामी वित्तीय वर्ष (31 मार्च तक) में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों से खाली होने वाले पदों की स्पष्ट गणना।
  • पदोन्नति (DPC) पद: अधीनस्थ सेवाओं (जैसे RTS) से राज्य सेवाओं (RAS) में पदोन्नति के फलस्वरूप रिक्त होने वाले पदों का निर्धारण।
  • नवनिर्मित पद: नए प्रशासनिक उपखंडों (SDM Offices), तहसीलों, उप-तहसीलों या नए विभागों/योजनाओं के गठन से राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत नए पद।
  • डेपुटेशन व लीव रिजर्व: प्रतिनियुक्ति (Deputation), उच्च अध्ययन, प्रशिक्षण या लंबी छुट्टी पर रहने वाले अधिकारियों हेतु आरक्षित पदों का समायोजन।
  • संशोधित पद गणना: भर्ती प्रक्रिया के दौरान भी परीक्षा परिणाम घोषित होने से पूर्व तक रिक्तियों में वृद्धि या संशोधन का प्रावधान लागू रहता है।
चरण 2: नोडल एजेंसी - कार्मिक विभाग (DOP - Group A-1) द्वारा अर्थना का संकलन व आरक्षण निर्धारण

कार्मिक विभाग (Department of Personnel) नोडल एजेंसी के रूप में सभी विभागों के आंकड़े संकलित कर 'अर्थना' (Requisition Proposal) तैयार करता है:

  • सेवावार विभाजन: राज्य सेवाओं (RAS, RPS, RACS, RTS, Commercial Tax Officers आदि) तथा अधीनस्थ सेवाओं के पदों का पृथक-पृथक वर्गीकरण।
  • वर्टिकल (लंबवत) आरक्षण रोस्टर: अनुसूचित जाति (SC - 16%), अनुसूचित जनजाति (ST - 12%), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC - 21%), अति पिछड़ा वर्ग (MBC - 5%), तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS - 10%) का बिंदुवार रोस्टर पंजिका के अनुसार स्पष्ट आवंटन।
  • क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण:
    • महिला अभ्यर्थियों हेतु 30% आरक्षण (जिसमें 8% विधवा व 2% परित्यक्ता/विच्छेदित विवाह उप-कोटा शामिल)।
    • विशेष योग्यजन (PwD - 4% श्रेणीवार), उत्कृष्ट खिलाड़ी (2%) तथा भूतपूर्व सैनिक (Ex-Servicemen) कोटा का नियमानुसार समावेश।
  • बैकलॉग पदों का समायोजन: पूर्व भर्ती में योग्य अभ्यर्थी न मिलने से खाली रहे आरक्षित (SC/ST/OBC आदि) बैकलॉग पदों को स्पष्ट दर्शाया जाता है।
चरण 3: RPSC के लीगल, परीक्षा व भर्ती अनुभाग द्वारा अर्थना का वैधानिक परीक्षण

कार्मिक विभाग से अर्थना प्राप्त होने पर आयोग का लीगल सेक्शन सूक्ष्म कानूनी जाँच करता है:

  • रोस्टर पॉइंट एवं बैकलॉग परीक्षण: क्या बिंदुवार रोस्टर पंजिका का नियमानुसार पालन हुआ है और बैकलॉग पद संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप हैं?
  • सेवा नियम 1999 अनुपालन: पदवार शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, आयु सीमा और छूट के कानूनी प्रावधानों की जाँच।
  • आपत्ति निस्तारण एवं वापसी: किसी भी प्रकार की विसंगति या रोस्टर संबंधी त्रुटि पाए जाने पर RPSC अर्थना को आपत्तियों के साथ कार्मिक विभाग को पुनः भेज देता है। जब तक संशोधन नहीं होता, विज्ञापन जारी नहीं किया जाता।
चरण 4: RPSC द्वारा आधिकारिक विस्तृत भर्ती विज्ञापन का प्रकाशन

अर्थना पूर्णतः सही पाए जाने पर आयोग विस्तृत विज्ञापन जारी करता है, जिसमें निम्न जानकारी अनिवार्य रूप से होती है:

  • पद विवरण एवं वर्गीकरण: राज्य सेवा और अधीनस्थ सेवा वार कुल पदों और श्रेणीवार आरक्षित पदों का ब्रेकअप।
  • शैक्षणिक योग्यता: भारत में विधि द्वारा स्थापित किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री। (अंतिम वर्ष में अध्ययनरत अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते मुख्य परीक्षा से पूर्व डिग्री पूर्ण होने का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है)।
  • आयु सीमा व छूट (आयु की गणना 1 जनवरी के आधार पर): न्यूनतम 21 वर्ष तथा अधिकतम 40 वर्ष। SC/ST/OBC/MBC/EWS पुरुषों को 5 वर्ष, इन वर्गों की महिलाओं को 10 वर्ष तथा सामान्य वर्ग की महिलाओं को 5 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा में छूट। अराजपत्रित कर्मचारियों (Non-Gazetted Employees) हेतु ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष है।
  • आवेदन अवधि व शुल्क संरचना: न्यूनतम 30 दिनों का आवेदन समय तथा One Time Registration (OTR) प्रणाली के अनुसार परीक्षा शुल्क नियमावली।
चरण 5: SSO Portal, One Time Registration (OTR) एवं डिजिटल फॉर्म सबमिशन
  • SSO Portal Integration: अभ्यर्थी राजस्थान सरकार के Single Sign-On (SSO) पोर्टल के माध्यम से रिक्रूटमेंट पोर्टल पर लॉगिन करते हैं।
  • OTR सत्यापन व त्रुटिहीनता: जन-आधार या आधार कार्ड के माध्यम से अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग और बायोमेट्रिक विवरण एक बार सत्यापित होता है, जिससे छद्म (Dummy) उम्मीदवारों और वर्तनी गलतियों पर पूरी तरह रोक लगती है।
  • ऑनलाइन संशोधन विंडो (Form Correction): आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त होने के पश्चात् आयोग अभ्यर्थियों को निर्धारित शुल्क के साथ प्रविष्टियों (जैसे फोटो, हस्ताक्षर, शैक्षणिक विवरण) में संशोधन हेतु 10 दिनों की ऑनलाइन संशोधन विंडो प्रदान करता है।
चरण 6: तीन-स्तरीय त्रि-स्तरीय परीक्षा चयन प्रक्रिया का संचालन
(A) प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Examination)
  • प्रकृति: यह केवल अहर्ता/छंटनी परीक्षा (Screening Test) है। इसके अंक अंतिम चयन मेरिट में नहीं जोड़े जाते।
  • संरचना: 'सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान' (General Knowledge & General Science) का 200 अंकों का एक प्रश्नपत्र। कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और 3 घंटे की समयावधि।
  • नेगेटिव मार्किंग: प्रत्येक गलत उत्तर के लिए प्रश्न के अंक का 1/3 भाग काटा जाता है।
  • 5वाँ विकल्प नियम (Mandatory OMR Rule): ओएमआर शीट में अनुत्तरित प्रश्नों में 5वाँ विकल्प ('E') गहरा काला करना अनिवार्य है। 10% से अधिक प्रश्न खाली छोड़ने वाले अभ्यर्थी को सीधे अयोग्य (Disqualified) घोषित कर दिया जाता है। 10% से कम प्रश्न खाली रहने पर प्रति प्रश्न 1/3 अंक की कटौती होती है। इसके लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है।
  • उत्तीर्ण मानदंड: कुल विज्ञापित पदों के लगभग 15 गुना अभ्यर्थियों को श्रेणीवार कट-ऑफ के आधार पर मुख्य परीक्षा हेतु उत्तीर्ण घोषित किया जाता है।
(B) मुख्य परीक्षा (Mains Written Examination)
  • प्रकृति: यह वर्णात्मक, विश्लेषणात्मक और विषयगत लिखित परीक्षा है। इसके कुल 800 अंक अंतिम मेरिट में सीधे जुड़ते हैं। इसमें 200-200 अंकों के 4 अनिवार्य पेपर होते हैं (समय: प्रति पेपर 3 घंटे):
  • Paper I - General Studies I (200 अंक): इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परंपरा व विरासत, भारतीय व विश्व अर्थशास्त्र, राजस्थान की अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र, प्रबंधन, लेखांकन एवं अंकेक्षण।
  • Paper II - General Studies II (200 अंक): प्रशासनिक नीतिशास्त्र (Administrative Ethics), सामान्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भूगोल (विश्व, भारत एवं राजस्थान)।
  • Paper III - General Studies III (200 अंक): भारतीय राजनीतिक व्यवस्था, विश्व राजनीति व समसामयिक मामले, लोक प्रशासन की अवधारणाएं, खेल एवं योग, विधि (Law), व्यवहार (Behavior)।
  • Paper IV - General Hindi & General English (200 अंक): सामान्य हिंदी (120 अंक) एवं सामान्य अंग्रेजी (80 अंक) - व्याकरण, संक्षिप्तिकरण, पल्लवन, पत्र लेखन, निबंध व अनुवाद।
  • प्रश्न प्रकार: अति-लघुउत्तरीय (2 अंक - 15 शब्द), लघुउत्तरीय (5 अंक - 50 शब्द), तथा दीर्घउत्तरीय/निबंधात्मक (10 अंक - 100 शब्द)।
  • उत्तीर्ण मानदंड: कुल रिक्तियों के लगभग 3 गुना अभ्यर्थियों को साक्षात्कार हेतु सफल घोषित किया जाता है।
(C) व्यक्तित्व परीक्षण एवं साक्षात्कार (Personality Test & Interview)
  • अंक भार: कुल 100 अंक।
  • मूल्यांकन मानदंड: RPSC आयोग के सदस्यों, विषय विशेषज्ञों, पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा अभ्यर्थी के व्यक्तित्व, त्वरित निर्णय क्षमता, मानसिक सतर्कता, नेतृत्व गुण, प्रशासनिक अभिवृत्ति और राजस्थान की संस्कृति व समसामयिक मामलों की समझ का आकलन किया जाता है।
चरण 7: अंतिम मेरिट सूची का निर्माण एवं RPSC की आधिकारिक अनुशंसा

मुख्य लिखित परीक्षा (800 अंक) + साक्षात्कार (100 अंक) = कुल 900 अंकों में से प्राप्त कुल प्राप्तांकों के आधार पर एकीकृत राज्य-स्तरीय और श्रेणीवार मेरिट सूची तैयार की जाती है। प्रारंभिक परीक्षा के अंक इसमें नहीं जुड़ते। यदि दो अभ्यर्थियों के समान अंक हों, तो मुख्य परीक्षा में अधिक अंक पाने वाले या आयु में ज्येष्ठ अभ्यर्थी को वरीयता दी जाती है। आयोग यह अंतिम अनुशंसा सूची कार्मिक विभाग को प्रेषित करता है।

चरण 8: कार्मिक विभाग द्वारा कैडर/पद आवंटन, मेडिकल परीक्षण एवं सत्यापन
  • सेवा व कैडर आवंटन: मेरिट रैंक, अभ्यर्थी की श्रेणी और आवेदन फॉर्म में भरी गई सेवा प्राथमिकताओं (Service Preferences) के आधार पर पद आवंटन (RAS, RPS, RACS, RTS आदि) किया जाता है।
  • चिकित्सा परीक्षण (Medical Board Exam): राज्य सरकार द्वारा मनोनीत अधिकृत मेडिकल बोर्ड द्वारा अभ्यर्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण। RPS (राजस्थान पुलिस सेवा) हेतु न्यूनतम ऊंचाई, सीने की चौड़ाई, नोक-नी, और विजन (दृष्टि मानक) विशेष रूप से जाँचे जाते हैं।
  • पुलिस चरित्र सत्यापन: अभ्यर्थी के गृह जिले के पुलिस प्रशासन (CID/Special Branch) द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि, एफआईआर या किसी भी कानूनी मामले का चरित्र सत्यापन।
  • नियुक्ति आदेश: सभी दस्तावेज व सत्यापन सही पाए जाने पर कार्मिक विभाग द्वारा औपचारिक नियुक्ति व पदस्थापना आदेश जारी किए जाते हैं।
चरण 9: HCM RIPA में संस्थागत, व्यावसायिक व क्षेत्रीय व्यावहारिक प्रशिक्षण

नवनियुक्त अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने हेतु HCM RIPA (हरीश चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान, जयपुर) तथा इसकी क्षेत्रीय शाखाओं (उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर) में गहन प्रशिक्षण दिया जाता है:

  • संस्थागत फाउंडेशन कोर्स (3 माह): अखिल भारतीय सेवाओं की तर्ज पर राज्य सेवाओं का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण (संविधान, कानून, लोक प्रशासन, ई-गवर्नेंस, वित्तीय नियम - GF&AR, आपदा प्रबंधन)।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण (Professional Training): राजस्व कानून (Rajasthan Land Revenue Act 1956, Tenancy Act 1955), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS/CrPC), भू-अभिलेख प्रबंधन और कंप्यूटरीकरण।
  • जिला व्यावहारिक फील्ड अटैचमेंट: उपखंड अधिकारी (SDM Office), तहसीलदार, जिला कलक्टर कार्यालय, विकास अधिकारी (BDO), नगर निगम, पुलिस थानों और जिला न्यायालयों के साथ व्यावहारिक कार्य-प्रणाली का ऑन-फील्ड अनुभव।
चरण 10: प्रोबेशन अवधि, विभागीय परीक्षा (Departmental Exam) एवं सेवा स्थायीकरण
  • 2 वर्ष की प्रोबेशन अवधि: कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 2 वर्ष तक अधिकारी प्रोबेशनर ट्रेनी (Probationer Trainee) के रूप में कार्य करते हैं, जिसमें सरकार द्वारा नियत पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) देय होता है।
  • विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य: HCM RIPA द्वारा आयोजित राजस्व कानून, सामान्य कानून, हिंदी पत्राचार व कंप्यूटर दक्षता की विभागीय परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
  • सेवा का स्थायीकरण (Confirmation): 2 वर्ष की संतोषजनक सेवा, विभागीय परीक्षा में सफलता, तथा सतर्कता विभाग (Vigilance Clearances) की रिपोर्ट के आधार पर कार्मिक विभाग द्वारा अधिकारी को स्थायी (Permanent Cadre) घोषित कर नियमित वेतनमान (Pay Matrix) लागू किया जाता है।

2. RPSC आधिकारिक वेबसाइट, हेल्पलाइन पोर्टल एवं नागरिक संपर्क केंद्र

अभ्यर्थियों की सहायता, शिकायत निवारण एवं आधिकारिक सूचनाओं के लिए डिजिटल पोर्टल व संपर्क सूत्र:

(A) आधिकारिक वेब पोर्टल्स

मुख्य वेबसाइट: rpsc.rajasthan.gov.in
आवेदन एवं प्रवेश पत्र पोर्टल: sso.rajasthan.gov.in (Recruitment Portal)
पोर्टल सेवाएँ: विज्ञापन डाउनलोड, OTR प्रोफाइल निर्माण, उत्तर कुंजी पर ऑनलाइन आपत्ति (Answer Key Objection), मुख्य परीक्षा उत्तरपुस्तिका री-काउंटिंग आवेदन, इंटरव्यू कॉल लेटर डाउनलोड।

(B) हेल्पलाइन एवं कंट्रोल रूम नंबर

RPSC पूछताछ एवं टेलीफोन एक्सचेंज: 0145-2635200 / 0145-2635212
परीक्षा सहायता केंद्र / हेल्पडेस्क: 0145-2635255
SSO / OTR तकनीकी हेल्पलाइन: 0141-2922241 / 0141-2922242
आधिकारिक ई-मेल: feedback.rpsc@rajasthan.gov.in

(C) RPSC मुख्यालय पता एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय

पता: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), जयपुर रोड, घुघरा घाटी, अजमेर, राजस्थान - 305001

कार्य दिवस एवं समय: सोमवार से शुक्रवार (प्रातः 9:30 बजे से सायं 6:00 बजे तक)। शनिवार, रविवार एवं राजकीय अवकाशों में कार्यालय बंद रहता है।
राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन: किसी भी शिकायत या परीक्षा संबंधी अनुचित साधन की सूचना हेतु राज्य हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल कर सकते हैं।

3. RAS भर्ती से संबद्ध मुख्य प्राधिकरणों की शक्तियाँ, कार्य एवं सीमाएँ

प्रशासनिक व्यवस्था, परीक्षा संचालन एवं कानूनी ढाँचे में शामिल संस्थानों की विस्तृत भूमिका:

(A) राज्य सरकार एवं कार्मिक विभाग (DOP)

प्रशासनिक शक्तियाँ: कैडर पुनरीक्षण, नए पदों का सृजन, पदों की संख्या बढ़ाना या घटाना; सेवा नियमों (Rules 1999) में संशोधन; आरक्षण रोस्टर एवं ऊपरी आयु सीमा में छूट का निर्धारण; सेवा/कैडर आवंटन तथा अधिकारियों का स्थानांतरण व पदस्थापना।
संवैधानिक सीमाएँ: RPSC की गोपनीय परीक्षा प्रक्रिया, पेपर सेटिंग या ओएमआर शीट मूल्यांकन में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती; RPSC द्वारा भेजी गई सिफारिशों को अस्वीकार करने पर अनुच्छेद 323 के तहत राज्य विधानसभा के पटल पर लिखित कारण प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

(B) राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)

संवैधानिक शक्तियाँ: परीक्षा तिथियों का निर्धारण, केंद्र आवंटन व गोपनीयता में पूर्ण स्वायत्तता; पेपर सेटर्स, मॉडरेटर्स एवं परीक्षकों की नियुक्ति; डिजिटल उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन (On-Screen Marking); साक्षात्कार बोर्डों का गठन; पदोन्नति हेतु DPC (Departmental Promotion Committee) बैठकों की अध्यक्षता।
संवैधानिक सीमाएँ: RPSC केवल एक सिफारिशी निकाय (Advisory Body) है; बिना DOP अर्थना प्राप्त हुए भर्ती विज्ञापन जारी नहीं कर सकती; आरक्षण के नियमों या आयु सीमा के प्रावधानों में अपनी मर्जी से बदलाव नहीं कर सकती; अभ्यर्थियों को सीधे नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर सकती।

(C) राजस्थान उच्च न्यायालय (High Court)

न्यायिक शक्तियाँ: भर्ती प्रक्रिया, नियम अनुपालन, विवादित उत्तर कुंजी एवं आरक्षण रोस्टर की जाँच हेतु न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review); संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिकाएँ (जैसे - परमादेश, प्रतिषेध) स्वीकार करना; गंभीर अनियमितता पर परीक्षा प्रक्रिया पर स्थगनादेश (Stay Order) देना।
न्यायिक सीमाएँ: न्यायालय स्वयं प्रश्नपत्रों के उत्तर तय करने वाला विशेषज्ञ नहीं बनता (मामले को RPSC की न्यूट्रल विशेषज्ञ समिति को भेजता है); जब तक कोई निर्णय असंवैधानिक या अवैध न हो, नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करता।

(D) HCM RIPA (प्रशिक्षण संस्थान)

प्रशिक्षण शक्तियाँ: चयनित अधिकारियों हेतु इंडक्शन व फाउंडेशन पाठ्यक्रम का निर्धारण; हॉस्टल व कैंपस अनुशासन बनाए रखना; जिला व्यावहारिक अटैचमेंट संचालित करना; विभागीय परीक्षाओं का आयोजन।
प्रशासनिक सीमाएँ: ट्रेनी अधिकारियों को सीधे निलंबित या बर्खास्त नहीं कर सकता; अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु केवल संस्तुति रिपोर्ट कार्मिक विभाग (DOP) को भेज सकता है।

4. RPSC की संवैधानिक स्थिति एवं अनुच्छेद-वार अति-विस्तृत विश्लेषण

भारतीय संविधान के भाग XIV (Part 14) में वर्णित अनुच्छेद 315 से 323 तक के विस्तृत प्रावधान:

अनुच्छेद संवैधानिक प्रावधान एवं विस्तृत प्रशासनिक/कानूनी व्याख्या
अनुच्छेद 315 संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग। इसके तहत राजस्थान राज्य हेतु स्वायत्त 'राजस्थान लोक सेवा आयोग' का गठन किया गया है। इसे किसी साधारण राज्य विधायी कानून द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 316 अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति एवं पदावधि। नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है। आयोग में 1 अध्यक्ष तथा 7 सदस्य होते हैं। कुल सदस्यों में से कम से कम आधे (50%) सदस्यों को भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन न्यूनतम 10 वर्ष का प्रशासनिक अनुभव होना अनिवार्य है। कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) होता है (41वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा आयु 60 से 62 की गई)। पुनर्नियुक्ति वर्जित है।
अनुच्छेद 317 लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाया जाना या निलंबित किया जाना। पद से हटाने का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है (सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 145 के तहत की गई जाँच में दुर्व्यवहार सिद्ध होने पर)। जाँच लंबित रहने के दौरान राज्यपाल अध्यक्ष/सदस्य को निलंबित कर सकते हैं। दिवालिया होने, मानसिक अयोग्यता या वैतनिक नियोजन में संलग्न होने पर राष्ट्रपति सीधे पदमुक्त कर सकते हैं।
अनुच्छेद 318 आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों के बारे में नियम बनाने की शक्ति। राज्यपाल को नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, परंतु नियुक्ति के पश्चात् सेवा-शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 319 आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने पर प्रतिषेध। RPSC अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद केवल UPSC के अध्यक्ष/सदस्य या अन्य State PSC के अध्यक्ष बन सकते हैं। सदस्य अन्य State PSC या UPSC के अध्यक्ष बन सकते हैं, परंतु केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य वैतनिक पद पर कार्य नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 320 लोक सेवा आयोगों के कर्तव्य। राज्य सेवाओं की सीधी भर्ती परीक्षाओं का संचालन करना, पदोन्नति (DPC) के सिद्धांतों का निर्धारण, एक सेवा से दूसरी सेवा में स्थानांतरण तथा लोक सेवकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक मामलों में परामर्श देना।
अनुच्छेद 321 लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति। राज्य विधानमंडल कानून बनाकर RPSC के अधिकार क्षेत्र में अतिरिक्त कार्य या अन्य स्थानीय निकायों/स्थानीय प्राधिकरणों की भर्तियों का दायित्व सौंप सकता है।
अनुच्छेद 322 लोक सेवा आयोग के व्यय। अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मचारियों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन सहित आयोग के सभी प्रशासनिक व्यय 'राजस्थान राज्य की संचित निधि' (Consolidated Fund of Rajasthan) पर भारित होंगे, जिस पर विधानसभा में मतदान नहीं होता।
अनुच्छेद 323 लोक सेवा आयोग की रिपोर्ट। RPSC प्रतिवर्ष आयोग द्वारा किए गए कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपता है। राज्यपाल इस रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं। यदि सरकार आयोग की किसी सलाह को स्वीकार नहीं करती, तो असहमति का कारण ज्ञापन (Memorandum) के रूप में विधानसभा में प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

5. परीक्षा सुरक्षा, वर्तमान में किए गए आधुनिक नवाचार सुधार एवं Pro-Rata गणितीय प्रक्रिया

परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी व त्रुटिहीन बनाने हेतु लागू नवीन नीतियाँ:

(A) भर्ती परीक्षा प्रणाली में किए गए नवीनतम सुधारात्मक नवाचार
  • 5वाँ विकल्प नियम (OMR Strict 5th Option Rule): अनुत्तरित प्रश्नों में हेराफेरी रोकने हेतु ओएमआर शीट में 5 विकल्प (A, B, C, D, E) दिए जाते हैं। उत्तर न देने की स्थिति में 5वें विकल्प ('E') को गहरा काटना अनिवार्य है।
    • यदि अभ्यर्थी कुल प्रश्नों के 10% से अधिक प्रश्न (उदा. 150 में से 15 से अधिक) बिना गोला भरे छोड़ देता है, तो उसे परीक्षा से सीधे अयोग्य (Disqualified) घोषित कर दिया जाता है।
    • यदि 10% से कम प्रश्न खाली रहते हैं, तो प्रति खाली प्रश्न 1/3 अंक काटा जाता है। इसके लिए परीक्षा में 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है।
  • बायोमेट्रिक सत्यापन एवं AI फेस-रिकग्निशन: डमी कैंडिडेट्स/छद्म अभ्यर्थियों को रोकने के लिए परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर रियल-टाइम बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट तथा बायो-फेस स्कैनर द्वारा अभ्यर्थियों का सत्यापन किया जाता है।
  • अनुचित साधन अधिनियम (Anti-Paper Leak Law & STF/SOG Action): परीक्षा पत्र लीक या नक़ल रोकने हेतु राज्य सरकार द्वारा कठोर कानून के तहत संपत्ति ज़ब्त करने, 10 वर्ष तक की जेल एवं आजीवन परीक्षा से डिबार (Debar) करने का प्रावधान।
  • डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (On-Screen Evaluation): मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की बारकोडिंग/डिकोडिंग के पश्चात् हाई-रिज़ॉल्यूशन स्कैनिंग कर विषय विशेषज्ञों द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर पारदर्शी जाँच।
  • OTR संशोधन व्यवस्था: वन टाइम रजिस्ट्रेशन में एक बार डेटा दर्ज होने के बाद अभ्यर्थियों को सुधार हेतु विशेष अवसर प्रदान करना ताकि त्रुटिवश फॉर्म निरस्त न हो।
(B) उत्तर कुंजी आपत्ति निस्तारण एवं Pro-Rata गणितीय समायोजन सूत्र

प्रारंभिक या मुख्य परीक्षा के बाद यदि विषय-विशेषज्ञ समिति द्वारा किसी त्रुटिपूर्ण प्रश्न को निरस्त (Delete) किया जाता है, तो शेष प्रश्नों का अंक मान बढ़ाने हेतु लागू Pro-Rata गणितीय सूत्र:

कुल प्राप्तांक = [ ( परीक्षा के कुल अधिकतम अंक ÷ शेष बचे वैध प्रश्नों की संख्या ) × सही उत्तरों की संख्या ] - [ गलत उत्तरों की संख्या × ऋणात्मक पेनल्टी ]

व्यावहारिक Pro-Rata उदाहरण:
मान लीजिए 200 अंकों के प्रश्नपत्र में कुल 150 प्रश्न हैं और विशेषज्ञ समिति द्वारा 5 प्रश्नों को निरस्त (Delete) कर दिया जाता है:

  • कुल वैध प्रश्न = 150 - 5 = 145 प्रश्न।
  • प्रत्येक शेष प्रश्न का नया अंक मान = 200 ÷ 145 = 1.3793 अंक प्रति प्रश्न (पहले यह 1.333 अंक था)।
  • गलत उत्तर हेतु ऋणात्मक पेनल्टी = 1.3793 ÷ 3 = 0.4597 अंक प्रति गलत उत्तर।