RPSC RAS प्रो-राटा अंक कैलकुलेटर
डिलीट प्रश्नों के आधार पर संशोधित अंकभार, ऋणात्मक अंकन (Negative Marking) और अंतिम प्राप्तांक की सटीक गणना
ऑनलाइन प्रो-राटा कैलकुलेटर विजेट
राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं के नए मूल्यांकन नियमों के अनुसार अपने अंकों की जाँच करें:
🎯 कैलकुलेटर का महत्व
RPSC/RSSB परीक्षाओं में प्रश्न डिलीट होने पर कुल पूर्णांक समान रहते हैं, जिससे हर सही प्रश्न का वेटेज बढ़ जाता है। यह टूल आपको बिल्कुल सटीक संशोधित स्कोर देता है।
📊 परीक्षा प्रासंगिकता
RAS, 2nd Grade, REET व अन्य राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं की कट-ऑफ का सही अनुमान लगाने और अपने सिलेक्शन की संभावना जाँचने के लिए यह अत्यधिक उपयोगी है।
⚙️ प्रो-राटा फार्मूला
वैध प्रश्नों की संख्या = (कुल प्रश्न - डिलीट प्रश्न)। नया अंक प्रति प्रश्न = (कुल अंक ÷ वैध प्रश्न)। इसी संशोधित मान पर आपके सही और गलत उत्तरों की गणना होती है।
⚠️ नेगेटिव मार्किंग प्रभाव
बोर्ड नियमों के अनुसार, 1/3 या 1/4 की पेनल्टी नए बढ़े हुए प्रति-प्रश्न अंक भार के आधार पर ही काटी जाती है, जिससे स्कोर पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
प्रो-राटा अंकन पद्धति एवं मूल्यांकन के मुख्य नियम
RPSC एवं RSMSSB बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली प्रो-राटा गणना से जुड़े प्रमुख वैधानिक नियम:
परीक्षा में प्रश्न डिलीट होने की स्थिति में कुल पूर्णांक (जैसे 200 अंक) में कोई कमी नहीं की जाती है। डिलीट हुए प्रश्नों के अंक शेष बचे हुए सभी वैध प्रश्नों में समान रूप से बाँट दिए जाते हैं।
डिलीट प्रश्नों को हटाने के पश्चात् प्रत्येक वैध प्रश्न का नया अंक मान निर्धारित करने हेतु निम्नलिखित सूत्र का उपयोग किया जाता है:
प्रति प्रश्न संशोधित अंकभार = (कुल अधिकतम अंक) ÷ (कुल प्रश्न - डिलीट प्रश्न)
गलत उत्तरों के लिए काटी जाने वाली पेनल्टी मूल अंक मान की बजाय हमेशा **नए बढ़े हुए प्रति-प्रश्न अंकभार** पर लागू होती है। यदि 1/3 नेगेटिव मार्किंग है, तो पेनल्टी = (नया अंकभार ÷ 3) होगी।
यदि किसी अभ्यर्थी ने अनुत्तरित प्रश्नों में 5वाँ गोला ('E') गहरा नहीं किया है, तो प्रति प्रश्न काटा जाने वाला दंड भी इसी नए संशोधित अंकभार के आधार पर काटा जाएगा। 10% से अधिक खाली छोड़ने पर अभ्यर्थी पूरी तरह अयोग्य (Disqualified) माना जाएगा।
प्रो-राटा गणना के दौरान परिणाम में आने वाले दशमलव अंकों की गणना 3 से 4 दशमलव स्थानों तक पूरी शुद्धता के साथ की जाती है ताकि अंतिम मेरिट में अभ्यर्थियों के बीच बराबरी का सही निस्तारण हो सके।
